
आज जब मैने अपना ब्लॉग बनाने के बारे में सोचा, तो मेरे ज़हन में सिर्फ़ एक बात गर्दिश कर रही थी की किस प्रकार अपनी भावनाओं को अपने दोस्त, अहबाब और मित्रों के साथ बाटूँ। बाँटने के लिए तो बहुत कुछ होता है इंसान के पास, घर से लेकर दफ्तर तक और दफ्तर से लेकर समाज तक चारों ओर सोचने और बाँटने के लिए हमेशा ही कुछ न कुछ होता है और है भी, लेकिन इत्तेफाक से आज ६ दिसम्बर का वो काला दिन भी है, जिस दिन देश के कुछ तथाकथित देश भक्तों ने पूरे संसार में भारत को कलंकित कर दिया था। खैर ...... आज देश जिन हालात से गुज़र रहा है, वो हमें केवल एक ही आवाज़ लगा रहे हैं कि हम सब एकजुट हो जाये एक दूसरे के दुःख दर्द में शरीक हो जायें। एक दूसरे पर तोहमत लगाने के बजाये सच्चाई को सामने लाने का प्रयास करें। अगर भारत के दुश्मन देश के बाहर हैं, तो देश के अन्दर भी ऐसे दुश्मनों की कोई कमी नही है। बस आवश्यकता इस बात की है कि हम ईमानदारी से इन दुश्मनों की पहचान करें और दुनिया के सामने इन्हें बेनकाब कर दे, लेकिन इस के लए हमें बिना किसी भेदभाव के मिलजुल कर और एक जागरूक शहरी की तरह काम करना होगा।
YameeN
6-12-08
4 comments:
hum aapke jazbaat kee qadr karte hain bhai bahut khoob
It is the sound of my soul which you expressed.
assalamaleikum wa ramatuallah-e-wa barakatuhu, aap ke khayalat pare par kar khushi hui. isliye nahi ke aap ek momin hai balki is liye ke aapne sach kaha hai. kiu ke such bohat kam log kehpate hai, agar yahi soch hamare mulq ke netaon ki hojaye to shayed is mulq ka ziyada bhala ho jayega. kiu ke bahar ke dusman tabhi kamiyab hote jab ghar wale gaddari pe amada ho jate hai. is liye ghar walon ko samjhna hoga.
neha ajaz(India)
kal hi aapse mulaqat huyi urdu unicode par batein huyin jo kuch aapne jana aaj nateeja bhi dekh liya,,,allah kare aapka blog kamyab rahe,,umar kairanvi
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