Wednesday, January 28, 2009

पीएम् इन वेटिंग ....

........................ايك انار

بھيروں سنگھ شيخاوت،نريندرمودي،انل امباني، سنيل متل، اوما بھارتي، گووند اچاريه اور كليان سنگھ، كيا ان سبھي ميں كوئي يكسانيت تلاش كي جاسكتي هے؟ بھلے هي يه سبھي الگ الگ شعبوں، الگ الگ عهدوں اور الگ الگ جماعتوں سے تعلق ركھتے هوں ليكن ان سبھي نے اپني عمر بھر كي سماجي كمائي سے وزيراعظم كے عهدے كا خواب سجائے ايل كے اڈواني كي راه ميں كسي نه كسي طريقے سے روڑے اٹكاديے هيں۔ ان سبھي كو هم دو زمروں ميں تقسيم كركے اس بحث كو آگے بڑھاسكتے هيں، ايك سياسي اور دوسرا كارپوريٹ سيكٹر۔ ديكھنا يه هے كه اڈواني كو اصل مشكل گھر كے اندر هے يا گھر كے باهر۔ يعني ان كے وزيراعظم بننے كي راه ميں بڑي ركاوٹ ان كي اپني پارٹي اور اس سے وابسته لوگ بنيںگے يا پھر حزب اختلاف يا حريف جماعتيں۔ في الحال جو تصوير نظرآرهي هے اس سے تو ايسا محسوس هوتا هے كه اڈواني كو وزارت عظميٰ تك پهنچنے كے ليے پهلے اپني پارٹي اور اپنے هم نواو ں سے هي لوها لينا هوگا، اس كے بعد هي ان كا اصل مقابله حريف جماعتوں سے هوگا۔اس بحث كو سياسي اور كارپوريٹ دنيا كو سامنے ركھتے هوئے آگے بڑھانا زياده مناسب معلوم هوتا هے۔ سياسي سطح پر اس بحث كا آغاز سابق نائب صدر اور بي جے پي كے بزرگ ليڈر بھيروںسنگھ شيخاوت نے كيا، توكارپوريٹ يا كاروباري سطح پر انل امباني اور سنيل متل نے نريندر مودي كو ملك كي قيادت كے ليے موزوں قرار دے كر ايك هنگامه پيدا كرديا۔ كاروباري دنيا كي كچھ نامور هستيوں نے ايك ايسے انسان كا نام وزارت عظميٰ جيسے باوقار عهدے كے ليے پيش كيا، جس كي ذهنيت اور جس كي شخصيت صرف نفرت ،دهشت، خونريزي، ظلم وتشدد اور انتشار كي عكاسي كرتي هے۔ آخر يه لوگ اپنے نفع اور نقصان كے آگے يه كيوں بھول جاتے هيں كه ملك يا كسي رياست كي ترقي كا پيمانه صرف كارخانے يا فيكٹرياں نهيں هوتيں؟ سماجي مساوات، پيار محبت انسانيت اور سماج كے ايك ايك شهري كي ترقي وخوشحالي مكمل ترقي كا اصل پيمانه هوتي هے۔ كيا امباني اور متل نے كبھي اپني دوسري آنكھ سے گجرات كي دوسري تصوير بھي ديكھي هے؟ اگر نهيں، تو انهيں ايك مرتبه ضرور گجرات كے هي مختلف شهروں ميں 2002كي مسلم نسل كشي كے بعد بنائے گئے پناه گزين كيمپوں كا جائزه لينا چاهيے۔ انهيں ان علاقوں كا بھي دوره كرنا چاهيے جهاں مارچ 2002كے بعد ايك مخصوص فرقے كو اپنے گھربار اور كاروبار چھوڑنے پر مجبور كرديا گيا اور وه آج تك اپني واپسي كا انتظار كررهے هيں۔ امباني اور متل كو گجرات فسادات پر يوسي بنرجي كميشن رپورٹ كا جائزه بھي لينا چاهيے۔ انهيں سپريم كورٹ كے وه ريماركس بھي شايد ياد هوں جن ميں ملك كي عدالت عظميٰ نے ان كے پسنديده رهنما كو ٫نيرو٬ تك كها هے۔كارپوريٹ دنيا كے سهارے نريندر مودي ملك كے عوام كو جوآئينه دكھانے كي كوشش كررهے هيں وه اتنا دھندلا اور بدنما هے كه اسے صاف كرتے كرتے مودي اور ان كے مداحوں كو ايك عهد دركارهوگا۔ وزارت عظميٰ كے بظاهر متفقه اميدوار قرار ديے جانے والے لال كرشن اڈواني بھي اپني شدت پسند هندوليڈر كي شبيه كو ختم نهيں كرپائے هيں۔ 90كي دهائي ميں اڈواني نے ملك بھر ميں هندو مسلم فسادات كرواكر نفرت كا جو بيج بويا تھا اگرچه اس شجر سياه كي آبياري كاكام اب مودي اور توگڑيا جيسے انتهاپسند هندوليڈران نے سنبھال ليا هے ليكن اڈواني كي منفي كارگذاريوں كو ملك كے انصاف پسند اور مهذب سماج نے بھلاديا هو ايسا هرگز نهيں هے۔ يهي وجه هے كه ٫پي ايم ان ويٹنگ٬ كانعره بلند كرنے كے باوجود اڈواني نه صرف اين ڈي اے بلكه ديگر جماعتوں ميں بھي اپنے نام پر متفقه مهر نهيں لگوا سكے هيں۔ اڈواني، مودي اور كارپوريٹ دنيا كو ياد ركھنا چاهيے كه انساني لاشوں پر ايك محدود مدت اور حلقے تك تو سياست كي جاسكتي هے ليكن وزارت عظميٰ جيسے عهدے كے ليے ضروري هے كه اميدوار كي سياست پيار محبت، بھائي چارگي، امن وآشتي اور اتحاد واتفاق پر مبني هو۔جهاں تك مودي كا سوال هے تو كارپوريٹ دنيا نے اپنا نفع نقصان ديكھتے هوئے بھلے هي ان كا نام وزارت عظميٰ كے ليے پيش كرديا هو ليكن اڈواني واجپئي كے بعد راج ناتھ سنگھ اور بھيروں سنگھ شيخاوت اس عهده كے مضبوط دعويدار هيں اور ان كے دلوں ميں بھي ايك خواب هے جس كا اظهار وه وقت پر هي كريں گے۔ دوسري نسل كے بھي كئي ليڈران ابھي وقت كے انتظار ميں هيں۔ ان ميں پارٹي كے موجوده صدراج ناتھ سنگھ، سابق صدر مرلي منوهر جوشي، ارون جيٹلي، سشماسوراج اور اب مدھيه پرديش كے وزيراعليٰ شيوراج سنگھ چوهان بھي اس فهرست ميں شامل هوگئے هيں۔ راجناتھ سنگھ كي اگربات كي جائے تو وه بھلے هي اپني آبائي رياست اترپرديش تك ميں پارٹي كے ليے كچھ خاص نهيں كرپائے ليكن آر ايس ايس سے ان كي قربت ان كے كام آسكتي هے۔ پارٹي صدر هونے كے ناطے اگر وه آئنده عام انتخابات ميں كوئي كرشمه كرسكے تو وه اس كے بعد اپنے ليے كسي بڑے رول كي فراق ميں تو ضرور هيں۔بي جے پي وزيراعظم كے عهدے كے ليے گرچه لال كرشن اڈواني كا نام اعلان كرچكي هے ليكن بھيروں سنگھ شيخاوت ،راج ناتھ سنگھ ،مرلي منوهر جوشي اور نريندر مودي كي آرزوئوں كي تسكين كيسے هوگي اس پر بي جے پي كو ابھي نهيں تو كبھي نه كبھي ضرور غور كرنا هوگا ورنه وه دن دور نهيں كه بي جے پي كے اندورن خانه هي ميان سے تلوار نه نكل جائيں۔اس بات سے بھي انكار نهيں كيا جاسكتا كه بي جے پي كي خانه جنگي سے يوپي اے كو آنے والے پارليماني انتخابات ميں فائده هوسكتا هے۔

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वाह रे राजनीति....!

हमारे देश की राजनीति भी क्या खूब है .... जिस तेज़ी और जिस चतुराई से हमारे नेता अपना चोल बदलते हैं उतनी तेज़ी से तो शायद समय भी नहीं बदलता..... जब तक हम गौर करते हैं या कुछ एक्शन लेना चाहते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, फिर हमें एहसास होता है कि हम तो ठगे जा चुके हैं। यह हमारी राजनीति में एक बार नहीं बार बार हो रहा है । देश की भोली भाली और मासूम जनता अपने इन राजनेताओं पर बार बार भरोसा करती है और यह राजनेता हैं कि वो बार बार अपनी मासूम जनता को आसानी से बेवकूफ बना कर निकल जाते है......

अब मुलायम सिंह को ही देख लीजिए..... लगता था की इनका नाम भले ही मुलायम है लेकिन ये फिरका परस्तों और तथाकथित देश भक्तों के लिए तो कठोर हैं ही । कभी कभी इन्हों ने इस का प्रदर्शन भी किया ...लेकिन अब ऐसा लगता है की मुलायम सिंह को अब केवल सत्ता सुख ही नज़र आ रहा है... कहीं येही तो सच्चाईनही की उन्हें केवल वोटो की राजनीति करनी थी सो उन्हों ने मुस्लिम वोट बैंक का खूब फायदा उठाया । अब शायद उन्हें लग रहा है की मुस्लिम वोटों की ज़रूरत नहीं रही तभी तो उन्हों ने बाबरी मस्जिद के कातिलों में से एक कल्याण सिंह की कीमत एक दो नहीं करीब दर्जन भर मुस्लिम उम्मीदवारों , करोड़ों मुस्लिम वोटों और मुसलामानों की अमूल्य भावनाओं से अधिक लगाई है ।

खैर , मुलायम सिंह ने अगले एलक्शन के मद्दे नज़र ही यह आत्मघाती फैसला किया है तो उन्हें इलेक्शन में ही पता चल जायेगा की एक आरोपी और सज़ा याफ्ता कल्याण सिंह की कीमत अधिक है या फिर लाखों करोड़ों लोगों की आहत हुई भावनाएं अधिक असरदार हैं .....
आज़म खान, शफीकुर्रहमान बर्क , सलीम शेरवानी , शाहिद अखलाक , कमाल अख्तर , अफजाल अंसारी , अतीक अहमद ..... यह वो नाम हैं जिन से समाजवादी पार्टी के ताबूत में कीलें ठुक्नी शुरू होती हैं.... सिलसिला जारी है ...... बस अब इंतज़ार इस बात का है के ताबूत में आख़री कील कौन और कब ठोकी जाती है ................!

YameeN