Friday, February 20, 2009

क्या हो गया है हिन्दी न्यूज़ चैनलों को ........?


पाकिस्तान, तालिबान, अफगानिस्तान, आतंकवाद, तबाह हो जाएगा पाकिस्तान , मिट जाएगा तालिबान, ख़त्म हो जाएगा नामो निशान, अब हमला हो कर रहेगा, पाकिस्तान के अब गिनती के दिन रह गए ....................... यह.... और चीख पुकार करते, दहाड़ते इन जैसे ही न जाने कितने जुमले आज कल हमारे हिन्दी न्यूज़ चैनलों की शोभा बढ़ा रहे हैं ........


देश की भोली भाली जनता यह खबरें देखती है, सुनती है ....... कोई यह खबरे देख कर हँसता है , कोई मुस्कुराता है, कोई डर जाता है, कोई खौफज़दा हो जाता है, कोई पड़ोसी मुल्क से नफरत करने लगता है, तो कोई अपने ही देश के लोगों पर शक करने लगता है ............. लेकिन


किसी भी पढ़े लिखे और समझदार भारतवासी की समझ में आज तक शायद यह नहीं आया होगा की इस तरह की चीख पुकार करने , सनसनी फैलाने और दहाड़ने का मकसद क्या है.....? हां एक बात ज़रूर सामने आती है... वो यह के यह सब टी आर पी का खेल है


मीडिया का काम तो कम से कम यह नही होता के वो जनता में आक्रोश पैदा करे , लोगों को भड़काए .............


टी आर पी के इस खेल में हमरे अधिकतर न्यूज़ चैनल पत्रकारिता के मूल मन्त्र को बिल्कुल नज़र अंदाज़ कर रहे हैं ...........


यह समाये तोड़ने का नहीं , जोड़ने का है


अगर हमारा पड़ोसी बिगडैल है तो इस का मतलब यह नहीं हम भी वैसे ही हो जाएँ ..... नैतिकता , अखलाक, सभ्यता और भैचार्गी में बड़ी ताक़त होती है ...... गोला बारूद और बंदूक से भी ज़्यादा ...... यह एक बार नही बार हुआ साबित हो चुका है...... हो हुआ ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा जिस से यह साबित हो के जंग से कोई मसला हल hua हो ..............

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