आई पी एल के चमकते बाज़ार में एक बार फिर किर्केट और (खेल) को नीलाम कर दिया गया ...क्यूँ .......? आखिर किर्केट और खिलाडियों ने क्या बिगाड़ा है .... खेल और ख़ास तौर पर किर्केट को तो भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधो को सुधारने का एक बड़ा माध्यम माना जाता है ..... हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि समय समय पर किर्केट ने दोनों देशों के बीच बढती दूरियों को कम क्या है .... नफरत की दीवारों को गिराया है ..... अवाम के बीच मोहब्बत की फिजा कायम की है और इस सब की एक ही वजह है ... वो यह कि दोनों देशों के किर्केट को केवल किर्केट की तरह ही देखते , उसे पसंद करते और उस का मज़ा लेते हैं .....लेकिन जब हम तस्वीर के दूसरे रुख को देखते है तो जो कुछ हमने आई पी एल की नीलामी के दौरान और उस के बाद देखा ..... उस पर हम अफ़सोस ही कर सकते हैं...
क्या आई पी एल के आयोजकों और पाकिस्तानी खिलाडयों को इस से दूर रखने वाली ताक़त जो परदे के पीछे से काम कर रही है ..... क्या वो इस बात का जवाब दे सकते हैं कि पाकिस्तानी खिलाडियों को न खिलाने से भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध मज़बूत हो जायेंगे ......? या पाकिस्तान और भारत में मौजूद उन ताक़तों के हौसले पस्त हो जायंगे जो नहीं चाहते कि दोनों देश एक अच्छे पडोसी की तरह रहें......? क्या इस सवाल का जवाब भी किर्केट प्रेमियों को मिलेगा कि २०-२० किर्केट की दुनिया के बड़े नामो की ग़ैर मौजूदगी में उन्हें किर्केट के इस संस्करण का भरपूर लुत्फ़ मिलेगा ......... इस का जवाब शायद आयोजक और इस आयोजन पर ग्रहण लगाने वाले
लोग न दे पायें .............! !!!!!!!!!
इस में कोई दो राये नहीं कि किर्केट के इस बाज़ार में वाकई किर्केट नीलम हो गया .... उसे इस बात का पैमाना मान लिया गया कि अगर हम पाकिस्तानी खिलाडियों को नहीं खिलाएंगे तो भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर हो जायेंगे .......... लेकिन हकीकत इस के बिलकुल बार अक्स है .................,,,,,
नीलामी के समय फ्रेंचैजीज़ के मालिकों के मुंह पर जो खामोशी थी उस में बहुत कुछ छुपा हुआ था.... हमें उस खामोशी को समझना होगा और उस का जवाब तलाश करना होगा ...............
1 comment:
blogers ki duniya me aap ka swagat hai. aap ke vichar ache hai.doosaro ke blogs padhe aur unko badhawa dee.
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