कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, और कश्मीरी ...?हमारे नेता , हमारे बुद्दिजीवी , हमारा मीडिया , हमारा इतिहास सभी इस बात पर एक राय हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है ,,,, बेशक कश्मीर भारत का ही एक राज्य है,,,,,,,, लेकिन जिस शिद्दत से कश्मीर को अपना हिस्सा बताया जाता है..... क्या कभी किसी सरकारी नुमायेंदे या आलोचकों कि ज़बान से यह कहते हुए सुना है कि जिस प्रकार कश्मीर हमारे देश का एक हिस्सा या खित्ता है.... उसी प्रकार कश्मीरी अवाम भी इसी देश के वासी हैं...? शायद नहीं .... यह सही है कि चंद कश्मीरी नौजवान हमारे एक पडोसी ( पाकिस्तान ) के बहकावे में आकर रास्ते से भटक गए .... और उन्होंने जन्नत निशान कश्मीर और कश्मीरियत का बहुत नुकसान क्या... लेकिन फिर भी क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि घर के बहके हुए किसी सदस्य को अपनाने के लिए या रास्ते पर लाने के लिए हर संभव कोशिश करें .....
आज कश्मीर के बच्चे अब पत्थर फेंक रहे हैं, खवातीन उनका हौसला बढ़ा रही हैं ... इनके ग़ुस्से की ज़बान पत्थर बन चुकी है। हमारी फ़ौज है कि उसे केवल गोली कि ज़बान ही आती है
बच्चों के हाथ में पत्थर हैं... औरतों के हाथ में पत्थर हैं ... क्या बड़े क्या छोटे, ग़रज़ हर किसी के हाथ में सिर्फ पत्थर है ... गोली या बंदूक नहीं ....
आखिर हम इन पत्थरों को अल्फाज कैसे बना सकते हैं? क्या दुनिया देखे कि दुनिया में एक खित्ता ऐसा भी है, जहां लोग बोलते हैं तो पत्थर बरसते हैं, जहां का लेखक अली मोहम्मद लोन कलम से नहीं, पत्थरों से ड्रामे लिखने लगेगा? जो सोचते हैं कि बन्दूक पत्थरों को झुका लेगी, वे गलत सोचते हैं, क्योंकि पत्थर टूट जाते हैं, झुकते नहीं।
हाल ही में जब कश्मीर के मुख्तलिफ हिस्सों में बेकसूर लोग खास तौर पर नौजवान मारे गये तो एक बिल्कुल ही नए तरीके का एहतेजाज और मुज़ाहिरे सामने आये हैं । कश्मीरी अवाम (बच्चे, औरतें, बूढ़े, जवान) ने अपनी नाराज़गी ईंट-पत्थरों से व्यक्त करनी शुरू कर दी। इंसान जब वाकई मजबूर, मायूस , मजलूम और असहाय हो जाता है, फिर वह पत्थर ही उठाता है और जब बात इससे आगे बढ़ती है तो फिर गोली और बंदूक कि बात होती है .... खुदा करे कश्मीर में फिर वो दिन न आयें .....
अगर खुदा नाख्वास्ता जन्नत निशान कश्मीर कि हसीं वादयों में अमन के नारों कि जगह एक बार फिर गोलीओं कि आवाजें गूंजने लगीं तो फिर इस का जवाबदेह कौन होगा ............ इसके लिए हमारे नुमाइंदों को तैयार रहना चाहए .....
यामीन अंसारी
९०१५७५६९८८
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