त्योहारों का मौसम है ,,, कुछ लोग खुशियाँ मन रहे हैं तो कुछ लोग मनाने की तय्यारी कर रहे हैं .... देश में हर तरफ हर्ष और उल्लास का माहौल है ... दुआ भी यही है कि यह माहौल अभी नहीं हमेशा बना रहे ..... मगर आने वाले दिनों में दो ऐसी तारीखें आ रही हैं जिन में से एक ने अगर भारत के समाजी और सियासी ढांचे की न केवल दशा और दिशा बदल दी , बल्कि देश की अस्मिता और देश के संविधान की धज्जियाँ उड़ते देख कर कुछ देर के लिए अमन पसंद लोगों का विश्वास भी डगमगा दिया ........ यानि बाबरी मस्जिद की शहादत का एक ऐसा धब्बा देश के दामन पर लगा कि आज तक उसके निशान बाक़ी हैं और आगे भी रहेंगे ........
दूसरी घटना ने तो पूरे विश्व के परिद्रश्य को बदल डाला ...... यानि ११ सितम्बर २००१ को अमरीका पर जो संदिघ्द हमला हुआ उस के बाद दुनिया ने उसके नाम पर जो देखा वह सबके सामने है .........
अब एक बार फिर इन घटनाओं को याद किया जा रहा है ....... याद भी ऐसे कि आम और अमन पसंद लोगको जैसे किसी आने वाले तूफ़ान का एहसास हो रहा हो ....... हो भी क्यूँ न ,,,,, एक ओर जहाँ ९/११ की बरसी मनाने के लिए अमरीका के एक पादरी ने इसे '' कुरान बर्निंग डे '' के तौर पर मनाने की घोषणा जो कर रखी है ........ एक आम आदमी भी इस के बाद होने वाली वैश्विक प्रितिक्रिया को समझ सकता है , तो ज़ाहिर है कि उस पादरी को भी इस बात का बखूबी एहसास होगा ....... आखिर ऐसे नफरत के सौदागर लोग चाहते क्या हैं ..... क्या वो मुक़द्दस कुरान की प्रीतियां जला कर दुनिया भर के अरबों मुसलमानों के सब्र का इम्तिहान लेना चाहता है या फिर वो क्रिया और प्रितिक्रिया के अमल को हवा देना चाहता है.....
अब बात देश में होने वाले अदालत के एक ऐसे फैसले की जो एक बार फिर भारत भर में उथल पुथल मचा सकता है .... यह फैसला आने वाली १७ सितम्बर को होना है .... बाबरी मस्जिद के सम्बन्ध में होना है यह फैसला , लेकिन अफ़सोस कि कुछ तथाकथित देश भक्तो हर धर्म के ठेकेदारों ने उस से पहले है अपना फैसला सुना दिया है । कुछ हिन्दू संगठनों ने साफ़ कर दिया है के अगर फैसला उन के हक में आया तो मानेंगे वरना नहीं .... अब इसे क्या कहेंगे .... जबकि मुस्लिम संगठन पहले सी ही कहते आये हैं और आज भी कह रहे हैं कि न्यायालय जो भी निर्णय देगी , वो हमें मंज़ूर है ,,, अब आप खुद ही फैसला करें अमन कौन चाहता है और दंगे फसाद कौन पसंद करता है ...
हर अपन पसंद भारतवासी की ज़िम्मेदारी है कि वो नफरत के इन सौदागरों के नापाक मंसूबे पूरे न होने दें .....
साथ ही हम मिलकर दुआ करें कि भारत और दुनिया भर में हमेशा अमन कायम रहे ....... फिर चाहे वो ११ सितम्बर को अमरीका पर हमले की बरसी हो या १७ सितम्बर को बाबरी मस्जिद के सम्बन्ध में आने वाला अदालत का बहुप्रतीक्षित निर्णय .............. आमीन
दूसरी घटना ने तो पूरे विश्व के परिद्रश्य को बदल डाला ...... यानि ११ सितम्बर २००१ को अमरीका पर जो संदिघ्द हमला हुआ उस के बाद दुनिया ने उसके नाम पर जो देखा वह सबके सामने है .........
अब एक बार फिर इन घटनाओं को याद किया जा रहा है ....... याद भी ऐसे कि आम और अमन पसंद लोगको जैसे किसी आने वाले तूफ़ान का एहसास हो रहा हो ....... हो भी क्यूँ न ,,,,, एक ओर जहाँ ९/११ की बरसी मनाने के लिए अमरीका के एक पादरी ने इसे '' कुरान बर्निंग डे '' के तौर पर मनाने की घोषणा जो कर रखी है ........ एक आम आदमी भी इस के बाद होने वाली वैश्विक प्रितिक्रिया को समझ सकता है , तो ज़ाहिर है कि उस पादरी को भी इस बात का बखूबी एहसास होगा ....... आखिर ऐसे नफरत के सौदागर लोग चाहते क्या हैं ..... क्या वो मुक़द्दस कुरान की प्रीतियां जला कर दुनिया भर के अरबों मुसलमानों के सब्र का इम्तिहान लेना चाहता है या फिर वो क्रिया और प्रितिक्रिया के अमल को हवा देना चाहता है.....
अब बात देश में होने वाले अदालत के एक ऐसे फैसले की जो एक बार फिर भारत भर में उथल पुथल मचा सकता है .... यह फैसला आने वाली १७ सितम्बर को होना है .... बाबरी मस्जिद के सम्बन्ध में होना है यह फैसला , लेकिन अफ़सोस कि कुछ तथाकथित देश भक्तो हर धर्म के ठेकेदारों ने उस से पहले है अपना फैसला सुना दिया है । कुछ हिन्दू संगठनों ने साफ़ कर दिया है के अगर फैसला उन के हक में आया तो मानेंगे वरना नहीं .... अब इसे क्या कहेंगे .... जबकि मुस्लिम संगठन पहले सी ही कहते आये हैं और आज भी कह रहे हैं कि न्यायालय जो भी निर्णय देगी , वो हमें मंज़ूर है ,,, अब आप खुद ही फैसला करें अमन कौन चाहता है और दंगे फसाद कौन पसंद करता है ...
हर अपन पसंद भारतवासी की ज़िम्मेदारी है कि वो नफरत के इन सौदागरों के नापाक मंसूबे पूरे न होने दें .....
साथ ही हम मिलकर दुआ करें कि भारत और दुनिया भर में हमेशा अमन कायम रहे ....... फिर चाहे वो ११ सितम्बर को अमरीका पर हमले की बरसी हो या १७ सितम्बर को बाबरी मस्जिद के सम्बन्ध में आने वाला अदालत का बहुप्रतीक्षित निर्णय .............. आमीन
यामीन अंसारी
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